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Kriyatmaka Ausadhiparichaya vijnan - Details

Kriyatmaka Ausadhiparichaya vijnan

Kriyatmaka Ausadhiparichaya vijnan

Book

Sri Vishwanath Dwivedi • 1966

TMC: G1281(MB)Hindi

Description

भारतवर्ष में आयुर्वेद के विद्यालय व महाविद्यालयों की संख्या कम नहीं है। कई स्टेटों में आयुर्वेद विद्यालय सरकार द्वारा भी परिचालित हैं। कई प्रान्तों में ये आयुर्वेद व यूनानी के चिकित्सा बोडों द्वारा सम्बद्ध व साहाय्य प्राप्त भी हैं। विश्वविद्यालयों से भी कई सम्बद्ध हैं। इनमें दो प्रकार के पाठ्य-क्रम परिचालित हैं। एक वह जिनमें विशुद्ध आयुर्वेद का कोर्स पढ़ाया जाता है। दूसरे वे जिनमें मिश्रित कोर्स पढ़ाया जाता है। दोनों प्रकार के विद्यालयों में दब्य गुण के विषय का पाठ्यक्रम केवल नाममात्र के क्रिषात्मक आधारों पर शिक्षा देते हैं। इनके किपात्मक विवरण में केवल मात्र औषधि दिखा देना ही या बहुत हुआ तो कहीं बनौषधि यात्रा करा करके पूरा समझ लिया जाता है। कुछ जगहों में तो इनका भी प्रवन्ध नहीं है। इस प्रकार एक-दो बार इब्य देखने से छात्र को सन्तोष नहीं होता, न स्मरण ही रह सकता है।

इधर बाज़ार में जो दव्य मिलते हैं उनमें मिलावट बहुत होती है। कौन

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Keywords

Charaksanhita sushrutsanhita ashtanghadrya Rajnidhaldu bhavprakashnighantu patra kand pushp fal

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