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Sangana -Sangeet Natak ekadami Ki trimasik Patrika - Details

Sangana -Sangeet Natak ekadami Ki trimasik Patrika

Sangana -Sangeet Natak ekadami Ki trimasik Patrika

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Tejsvarup trivedi - vijayshankar mishra • 2023

ISBN: issn-2454-8456 TMC: G1268(MB)

Description

भारतीय संस्कृति विश्व की प्राचीनतम संस्कृतियों में से एक है। सहस्राब्दियों से विभिन्न विघ्न-बाधाओं पर पार पाते हुए, विदेशी आक्रांताओं के विरुद्ध संघर्ष करते हुए, भारत को यह स्वतंत्र और आधुनिक स्वरूप प्राप्त हुआ है। आक्रमण और अतिक्रमण की निरंतरता में भी भारतीय अध्यात्म, संस्कृति और धर्म यदि बचे रहे तो यह निश्चय ही हमारे साधु, संतों, साहित्यकारों, संगीतकारों, वाग्गेयकारों की तपस्या और त्याग का प्रतिफल है। मध्यकाल में भारतीय मानस यदि निःशक्त और निश्शब्द होने से बचा रहा तो यह संत कवियों के पुण्य प्रयास का ही प्रतिफल है। जब सकल समाज दासता और निराशा के गहन अंधकार में विवश-व्याकुल भटक रहा था, तब भक्त कवियों ने अपने गीतिकाव्यों के माध्यम से नवधा भक्ति की संजीवनी दी और हृदय की व्याकुलता का शमन हुआ, मन में शांति का संचार हुआ, और लोग ईश्वर की आराधना में जीवन का सार पाने लगे।

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Keywords

Radhabav- krushnchandra goswami bhaklta mira-shreevast Goswami Shyamsudar dube Madhav Hada

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